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ओएमजी-2 के निर्माता अश्विन वर्दे ने फिल्म को लेकर सामने आए विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और परेश रावल के हालिया पॉडकास्ट में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह गलत, निराधार और चौंकाने वाला बताया है।
अश्विन वर्दे ने कहा, “परेश रावल ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में ओएमजी-2 को लेकर जो आरोप लगाए हैं, वे चौंकाने वाले, पूरी तरह गलत और बिना किसी आधार के हैं। इन आरोपों के बाद मेरे पास अब सार्वजनिक रूप से सच्चाई सामने रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इसलिए मैं ओएमजी-2 की पूरी यात्रा वैसी ही साझा करना चाहता हूं, जैसी वास्तव में हुई थी।
सबसे पहले वरिष्ठ अभिनेता पवन मल्होत्रा ने लेखक-निर्देशक अमित राय का नाम मुझे सुझाया था। मैं उनके साथ अपनी फिल्म ‘मुबारकां’ में काम कर चुका था। मेरी अमित से मुलाकात किसी दूसरी फिल्म के सिलसिले में हुई थी। इसके बाद हमारी दोस्ती हो गई और हम अक्सर बांद्रा स्थित उनके ऑफिस में मिला करते थे। एक दिन बातचीत के दौरान अमित ने मुझे एक कहानी सुनाई, जो मेरे मन में बस गई। वही कहानी आगे चलकर ओएमजी-2 बनी।
जब मैंने पहली बार यह कहानी सुनी तो मुझे तुरंत लगा कि इसका ढांचा पूरी तरह ओएमजी जैसा है। तब अमित ने बताया कि उन्होंने इसे उसी शैली में लिखा क्योंकि परेश रावल ने उनसे कहा था कि कहानी को ओएमजी के नैरेटिव के जितना संभव हो उतना करीब रखा जाए। अमित पहले ‘रोड टू संगम’ में परेश के साथ काम कर चुके थे और दोनों के बीच अच्छी समझ थी।
मुझे सबसे बड़ी चिंता यही थी कि ओएमजी, अक्षय कुमार या उनकी मंजूरी के बिना नहीं बन सकती, क्योंकि मुझे पता था कि इस फिल्म के बौद्धिक संपदा (आईपी) अधिकार उन्हीं के पास हैं।
अमित ने यही सवाल परेश रावल से भी किया था। तब परेश ने उनसे कहा कि आईपी उनके पास है और चिंता की कोई बात नहीं है। अमित को फिर भी संदेह था, लेकिन परेश ने उनसे यहां तक कहा कि अगर ओएमजी का सौवां भाग भी बनेगा, तो उसे वही लिखेंगे और निर्देशित करेंगे। इससे अमित को लगा कि परेश ही इस फिल्म के वास्तविक मालिक हैं। इसके बाद अमित ने पूरी स्क्रिप्ट लिखी। यह पूरी तरह उनकी मौलिक रचना थी। फर्क सिर्फ इतना था कि भगवान का किरदार, जिसे बाद में अक्षय कुमार ने निभाया, शुरुआत में एक फकीर का पात्र था।
यहीं मुझे साफ समझ में आ गया कि परेश क्या करना चाहते थे। वे ओएमजी जैसी ही फिल्म किसी दूसरे नाम से बनाना चाहते थे। मेरे हिसाब से यह अनैतिक और गैर-पेशेवर था। यह किसी और की रचना और संपत्ति को अलग नाम देकर इस्तेमाल करने की कोशिश थी। मेरे लिए यह सीधी-सीधी चोरी थी।
परेश अपने पॉडकास्ट में कहते हैं कि उन्होंने इस स्क्रिप्ट के साथ कई अभिनेताओं से संपर्क किया, लेकिन सभी ने मना कर दिया। वे यह नहीं बताते कि सभी ने मना क्यों किया। सभी का कहना था कि यह तो ओएमजी ही है और यह अक्षय कुमार की फिल्म है। उनकी मंजूरी लिए बिना इसमें क्यों शामिल हों?
उसी समय मुझे लगा कि इस स्क्रिप्ट को सुरक्षित किया जाना चाहिए। इसके बाद मेरी कंपनी वाकाओ फिल्म्स ने इस स्क्रिप्ट के अधिकार खरीद लिए।
यह स्क्रिप्ट तब भी और आज भी अमित राय के नाम पर पंजीकृत है। वे इस फिल्म के एकमात्र लेखक हैं। ऐसे में परेश रावल का स्क्रिप्ट का श्रेय मांगना पूरी तरह अनुचित है। हमारी कई बैठकों में उन्होंने कभी ऐसा दावा नहीं किया। शायद इसलिए क्योंकि इसमें कोई सच्चाई ही नहीं थी।
स्क्रिप्ट खरीदने के बाद अमित के कहने पर मैंने परेश रावल से मुलाकात की, लेकिन सिर्फ उन्हें फिल्म में अभिनय के लिए लेने के उद्देश्य से। हमारी पहली मुलाकात महालक्ष्मी के विलिंग्डन क्लब में हुई और दूसरी जुहू के मैंगी फेरा रेस्तरां में, जहां उनके किरदार पर चर्चा हुई।
तीसरी मुलाकात जुहू के सोहो हाउस में हुई। वहां मैंने उनसे साफ कहा कि इतनी समानता होने के कारण मैं सबसे पहले यह स्क्रिप्ट अक्षय कुमार को दिखाऊंगा। ऐसा करना नैतिक रूप से जरूरी है। उनकी प्रतिक्रिया देखकर मैं हैरान रह गया। वे बार-बार सिर्फ यही कहते रहे कि यह फिल्म ओएमजी नहीं बन सकती, लेकिन इसकी कोई ठोस वजह नहीं बता सके। धीरे-धीरे यह साफ हो गया कि वे किसी भी कीमत पर अक्षय कुमार को इस परियोजना से दूर रखना चाहते थे।
मैं खुद एक निर्माता हूं। मैं कभी ऐसा काम नहीं कर सकता जो किसी दूसरे निर्माता के हितों के खिलाफ हो। अगर मैं ‘शोले’ जैसी कहानी बनाऊं और सिर्फ ठाकुर बलदेव सिंह का किरदार महिला कर दूं, तो इससे फिल्म नई नहीं हो जाएगी। इसके लिए सिप्पी फिल्म्स की अनुमति लेना ही सही तरीका होगा।
मैंने उन्हें नैतिक और कानूनी दोनों पहलू समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी बात पर अड़े रहे। वे लगातार यही कहते रहे कि यह फिल्म ओएमजी नहीं बन सकती।
चूंकि उस समय तक स्क्रिप्ट हमारे पास आ चुकी थी, इसलिए हमने सही रास्ता चुना। इसी तरह ओएमजी-2 बनी।
इन सबके बावजूद फिल्म के लिए सबसे पहले हमने परेश रावल से ही संपर्क किया। अक्षय कुमार ने भी उनसे बात कर उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। हमने करीब दो महीने तक इंतजार किया और फिर आगे बढ़ गए।
मैं फिर दोहराना चाहता हूं कि इस पूरी यात्रा में परेश रावल की भूमिका सिर्फ एक अभिनेता की थी, इससे अधिक कुछ नहीं। उस समय हमारे बीच अभिनेता के रूप में एक अनुबंध भी तैयार किया गया था।
मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि ओएमजी-2 में परेश रावल को निर्माता के रूप में श्रेय दिया गया, जबकि उनका इस फिल्म में कोई योगदान नहीं था। उन्होंने यह श्रेय अपनी पत्नी स्वरूप परेश रावल और अपने बिजनेस पार्टनर हेमल ठक्कर के नाम से लिया।
इतना ही नहीं, उन्हें ओएमजी-2 के लिए तय राशि का भुगतान भी किया गया था, जिसका जिक्र उन्होंने अपने हालिया इंटरव्यू में नहीं किया।
मैं एक बार फिर साफ कहना चाहता हूं कि किसी ने भी परेश रावल के साथ कोई धोखा नहीं किया। अगर हम किसी बात के दोषी हैं, तो सिर्फ इस बात के कि हमने उन्हें ऐसा करने से रोका।”


